नई दिल्ली : अनुपम
जब भी बिहार में चुनाव का समय आता है तो सबसे ज्यादा चर्चा लालू यादव और यादवों का होता है, इसलिये ये जरुरी हो जाता है कि आप लालू और यादवों के बिच के रिश्तों के रहस्य को समझे,अक्सर बिहार चुनाव के वक्त राष्ट्रिय मिडीया में जातिगत राजनीति कि चर्चा होती है,बिहार में दर्जनो यादव नेता है,बावजूद इसके आज भी यादवों का लालू पर विश्वास कायम है, ये जानते हुए भी कि लालू यादव चारा घोटाले में दोषी पाए जाने के बाद से सजा काट रहे है.बिहार में चारा घोटाले से सबसे ज्यादा नुकसान यादवों को हुआ, जिसकी उन्हे कोई परवाह नही,उन्हे हमेशा जाती के नाम पर इस्तेमाल किया गया,बिहार में सबसे ज्यादा पशु यादव जाती के लोग पालते है, मसलन लालू जिस चारा घोटाले के आरोप मे सजा काट रहे है,उससे सबसे ज्यादा नुकसान बिहार के यादवों को हुआ,लेकिन दुर्भाग्य ही कहिये यादवो को इसका कोई मलाल नही, इतना तो छोड़िये जब कभी चारा घोटाले मे लालू को सजा सुनाई जाती है तो यही यादव रोड जाम करने सड़क पर उतर जाते है,जबकि उन्हे इस दिन उत्सव मनाना चाहिये।
जमुई जिले के केड़िया गांव का हाल, जहां 94 मे से 80 घर यादवों के हैं.
सत्याग्रह डॉट कॉम की 2015 के रिपोर्ट के अनुसार 2015 चुनाव के समय उनके रिपोर्टर का जमुई की पांडु पंचायत के एक गांव केड़िया में जाना होता है. यह जमुई विधानसभा क्षेत्र में आनेवाला एक ऐसा गांव है.जहां 94 घरों वाले इस गांव में 80 घर यादवों के हैं.सभी घरों में कम से कम दर्जन भर मवेशी.सब खेतिहर. पढ़ाई लिखाई से ज्यादा वास्ता नहीं.गांव में  शौचालय का नामो निसान नही और न ही यहां बिजली पहुंची है.कह सकते हैं कि केडिया बिहार के कुछ चुनिंदा गांवों में से है जो अब भी इस कदर पिछड़ा हुआ है.
लेकिन केडिया में मसला विकास का नहीं है.उस गांव के चौपाल में कई यादव एक साथ बैठे होते हैं.जब रिपोर्टर द्वारा ये पुछा जाता है कि इस चुनाव में वोट किसे देंगे. तो सामूहिक जवाब मिलता है-लालटेन और सिर्फ लालटेन.अगला सवाल लोकसभा में किसको दिये थे. सब एक साथ जवाब देते हैं-नरेंद्र मोदी को.तो अब क्या दिक्कत है मोदी से,यह पूछने पर सब एक दुसरे के तरफ देखने लगते है.
विकास उकास हम नही समझते,लालू यादव की इज्जत की बात है,वोट लालटेन को ही देंगे।
रिपोर्टर का अगला सवाल लालटेन को वोट क्यों.जवाब मिलता है कि लालू यादव की इज्जत की बात है. इतना ही नही गांव के एक निवासी कहते हैं, कि हमारे यहां से सांसद जयप्रकाश यादव का भाई खड़ा हुआ है,तो कैसे हारने देंगे. बात इतने पर ही नहीं रुकती.गांव की इस चौपाल में बैठे यादव, नरेंद्र मोदी को अपने भाषा में खुब गरियाते है और वहीं नीतीश कुमार की खुब तारीफ करते हैं.रिपोर्टर सवाल पूछते रह जाते हैं कि कैसा विकास किया है नीतीश जी ने कि आपका गांव जो सड़क किनारे है फिर भी अब तक बिजली नहीं, स्कूल नहीं, शौचालय नहीं. जवाब आता है कि इतना समझ में नहीं आता है, बस,राजद को जिताना है.
यादवों की राजनितीक महत्वाकांक्षा को इस आंकड़े से भी समझा जा सकता है कि बिहार विधानसभा चुनाव में राजद ने 101 में से 48 सीटें सिर्फ यादवों को दिया था.