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घोघरडीहा। प्रखंड क्षेत्र के सरकारी संबद्धता प्राप्त सभी निजी विद्यालय में एक सामान पाठ्यक्रम चलाने की मांग से सम्बंधित एक आवेदन पंचायत समिति सदस्य सुशील कामत ने शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव सहित मुख्य सचिव बिहार सरकार को प्रेषित किया है। पंसस श्री कामत के द्वारा दिये गए आवेदन के अनुसार निजी विद्यालय के संचालक मोटी कमाई के चक्कर में बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे है। सरकार द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम को दरकिनार कर मनमानी तरीके से पाठ्यपुस्तको का चयन कर बच्चों को पढ़ा रहे है। वर्ग एक से आठ तक पढ़ाई के लिए शिक्षा विभाग से सम्बद्ध लगभग सभी निजी विद्यालय अलग-अलग प्रकाशन का पाठ्यपुस्तक पढ़ाते है,जो अत्यधिक मंहगी होने के साथ काफी वजनी भी होती है। जिससे निजी विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र के अभिभावकों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ तो उठाना ही पड़ता है। वही बच्चे किताबों का अतिरिक्त बोझ झेलने को भी विवश हैं। जिसका प्रतिकूल असर बच्चों के स्वास्थ्य पर भी परना तय है। बताया जाता है कि किताबो की बोझ तले नैनिहलो का बचपन दबकर सिसकने को भी विवश हैं। वही अलग अलग प्राइवेट स्कूल में अध्ययनरत एक ही वर्ग के छात्रों के बीच सिलेबस को लेकर कंफ्यूज़न भी बनी रहती है। छात्रों को निजी पब्लिकेशन की बेवजह मोटी किताबो की अत्यधिक वजन की असहनीय पीड़ा भी झेलना पड़ता है। सरकार ने कॉपी किताब मिलाकर अधिक से अधिक साढ़े चार किलोग्राम वजन तय कर रखा है। जबकि प्राइवेट स्कूलों में पांच से आठ किलो वजनी कॉपी किताब ले जाने की मजबूरी होती है ||